मेरा विद्यालय पर निबंध |Essay On My School In Hindi 

मेरा विद्यालय पर निबंध|Essay On My School In Hindi 

यदि आप एक विद्यार्थी, शिक्षक या पैरेंट (parents) हो और आप सर्च कर रहे है मेरा विद्यालय पर निबंध | Essay On My School In Hindi तो आप बिलकुल सही जगह आए हैं। मै आपको आज मेरा विद्यालय पर सबसे बेहतरीन निबंध इस पोस्ट बताया हुं जिसे आप कहीं पर भी लिख सकते हो। आपको इसका PDF भी डाऊनलोड करने मिल जाएगा।

सामान्य परिचय

मेरा विद्यालय पर निबंध- मेरे  विद्यालय के विषय में लिखते हुए मुझे कुछ ऐसी प्रसन्नता हो रही है जैसी प्रसन्नता बालक को अपनी अच्छी माँ के विषय में बोलते हुए होती है । माँ हमारे शरीर की देख भाल करती है, विद्यालय हमारे मन प्राणों और विचारों की देखभाल करता है।

मेरा विद्यालय हममें अच्छे संस्कारों को जन्म देता है । उनका विकास करता है । विद्यालय ही वह स्थान के जहाँ बालक के चरित्र का विकास होता है । यहीं उसे अच्छा नागरिक बनने की शिक्षा दी जाती है।

यहीं उसके संस्कार बनते हैं और यहीं उसमें अपने परिवार वालों, जाति और देश के लोगों के प्रति जिम्मेदारी की भावना उत्पन्न होती है । इस दृष्टि से मेरा विद्यालय एक आदर्श संस्था है।

मेरे विद्यालय के क्लास रूम

मेरे विद्यालय का नाम राष्ट्रीय माध्यमिक शाला है (यहां आप अपने विद्यालय का नाम डालिए) । इसमें गुजराती, मराठी अंग्रेजी और हिन्दी भाषा के माध्यम से पढ़ाई होती है।

मेरा विद्यालय 3 मंजिला इमारत है इसमें कुल 21 कमरे हैं हर एक कमरे में 2 जालीदार खिड़की और एक पंखा लगा हुआ है जिससे मेरे विद्यालय के कमरे सुंदर एवं हवादार है।

इसके अलावा एक पुस्तकालय भी है साथ ही साथ स्टाफ रूम शिक्षकों के लिए कंप्यूटर कक्ष और हॉल भी बहुत सुंदरता से बनाई गई है।
इन सबसे हटकर प्रधानाचार्य का कक्ष बहुत ही अच्छे से सजाया हुआ है, जिसे देख कर सबका मन मोह जाएगा।

विद्यालय के बाहरी भाग में कतारों से विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे लगाए गए हैं जिसकी देखभाल माली और हम सब छात्र भी करते हैं।

हमें विद्यालय में बताया गया है कि पेड़-पौधे हमारे वातावरण के लिए कितना महत्वपूर्ण है इसलिए यह हमारी जिम्मेदारी बनती है कि उनकी पूरी देखभाल की जाए।

विद्यालय के पीछे एक बड़ा सा खेल का मैदान है जिसका आकार बहुत लंबा और चौड़ा है। इस मैदान में सभी प्रकार के खेल खेले जाते हैं जैसे कि क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो इत्यादि ।

इसी को ध्यान देते हुए छात्रों को खेलों का विशेष परीक्षण भी दिया जाता है। हमारे विद्यालय में बहुत से खेल प्रतियोगिता में भाग लेकर पिछले कई वर्षों से अनगिनत ट्रॉफी जीत कर लाई है। यह ट्रॉफी हमारे ऑफिस में चांद चार लगा देती है।

अंतिम पर कम नहीं मेरे विद्यालय में कुल 30 शौचालय है 15 लड़कों के लिए और 15 लड़कियों के लिए जो कि बहुत ही साफ सुथरा है हम भी चाहते हैं हमारे विद्यालय का भी यही है स्वच्छ भारत सुंदर भारत

विद्यालय के अध्यापक

मेरे विद्यालय के मुख्य अध्यापक श्री चतुर्भुज मेहता हैं। इन्होंने कई वर्ष वर्धा में गांधी जी के साथ काम किया था । मेरे विद्यालय में कला, विज्ञान और वाणिज्य के लगभग सभी विषय पढ़ाए जाते हैं। सभी विषयों के अध्यापक अपने-अपने विषय के अच्छे ज्ञाता हैं।

गुजराती के रसिकलाल पारीख, हिन्दी के देवकीनन्दन शर्मा, गणित के मनोहर जोशी, विज्ञान के आचार्य दवे और भूगोल-इतिहास के अध्यापक शांति पटेल विद्यार्थियों में बहुत लोकप्रिय है। अन्य सभी अध्यापक भी अपना काम पूरी जिम्मेदारी से करते है और हम सब बालकों का बड़ा ध्यान रखते हैं ।

मेरे विद्यालय में मेधावी विद्यार्थियों को ही प्रवेश मिलता है । यहाँ कोई भी ऐसा विद्यार्थी नहीं है, जो किसी न किसी विषय में अपनी कोई न कोई विशेषता न रखता हो ।

विद्यालय के विद्यार्थी

२०-२० विद्यार्थियों के गुट को एक अध्यापक के संरक्षण में रखा जाता है । इन विद्यार्थियों के स्कूल और परिवार सम्बन्धी सभी समस्याओं पर वह अध्यापक विचार करते है और उनकी भरसक सहायता करते है । इससे विद्यार्थी और अध्यापक के बीच एक घनिष्ट सम्बन्ध स्थापित हो जाता है और आपस में संकोच का भाव नहीं रह जाता ।

इससे विद्यार्थी और अध्यापक एक-दूसरे के प्रति अपनेपन की भावना विकसित करते हैं। मेरे विद्यालय में बहुत सी संस्थाएं हैं । इनमें साहित्य परिषद, विज्ञान परिषद, वाद-विवाद प्रतियोगिता समिति, क्रीड़ा-मंडल आदि प्रमुख हैं । लगभग सभी विद्यार्थी किसी न किसी संस्था के सदस्य हैं

विद्यालय की विभिन्न संस्थाएं

इन संस्थाओं में भाग लेने से विद्यार्थियों का परस्पर परिचय बढ़ता है और उसमें अपने गुणों को विकसित करने का अवकाश मिलता है । पढ़ाई के अतिरिक्त विद्यार्थी को अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए दूसरी चीजों की भी आवश्यकता होती है। ये संस्थाएं विद्यार्थी की इसी आवश्यकता को पूरा करती हैं।

मेरे विद्यालय की विशेषताएँ

मेरे विद्यालय की अपनी कुछ विशेषताएं भी हैं । सप्ताह में एक बार स्कूल के बड़े हॉल में बड़ी कक्षा के विद्यार्थियों को इकट्ठा किया जाता है और उनके सम्मुख विद्यालय के मुख्य अध्यापक प्रवचन करते हैं ।

इस प्रवचन में वे विद्यार्थियों को सप्ताह भर में समस्त विश्व में हुई घटनाओं की संक्षिप्त जानकारी देते हैं। उनका यह प्रवचन बहुत उपयोगी होती है। इससे विद्यार्थियों का ज्ञान बहुत बढ़ता है । इससे वे उन सब बातों को जान जाते हैं जो उनकी पाठ्यपुस्तकों में नहीं लिखी होती । दूसरे, बाहरी जगत की बातों के प्रति उनमें जिज्ञासा बढ़ती है।

मेरे विद्यालय की दूसरी विशेषता ‘ट्यूटोरियल’ (Tutorial) की व्यवस्था है। बहुत अच्छे और सामान्य विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग ट्यूटोरियल की कक्षाएं लगाई जाती हैं और उन्हें योग्य अध्यापकों द्वारा अच्छे ढंग से प्रशिक्षित किया जाता है जिस से वे परीक्षा में अच्छा ज्ञान प्राप्त करें ।

इसी प्रकार ‘भाषण मंच संस्था’ भी मेरे विद्यालय की एक विशेषता है । इस संस्था द्वारा विद्यार्थियों को भाषण कला का ज्ञान कराया जाता है।

विद्यालय का क्या आदर्श होना चाहिए

वास्तव में विद्यालय का आदर्श विद्यार्थियों के जीवन का सम्पूर्ण विकास करना होता है। विद्यालय में ही व्यक्ति नागरिक जीवन की शिक्षा पाता है । और में विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि अपना कर्तव्य निभाने में मेरा विद्यालय किसी विद्यालय से पीछे नहीं है।

मुझे गर्व है कि में राष्ट्रीय शाला का विद्यार्थी हूँ जो विद्यार्थियों को शिक्षा का दान ही नहीं देती, बल्कि उनको एक जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा प्रशिक्षण भी देती है।

आशा करता हूं आपको यह मेरे विद्यालय पर निबंध पसंद आया होगा, कृपया करके आप यह निबंध अपने दोस्तों को भी शेयर करे। और यदि आप टीचर या पैरेंट (parents) है तो अपने बच्चो को जरूर बताएं धन्यवाद।

आपको मेरे विद्यालय पर निबंध का PDF फाइल डाउनलोड करने का लिंक नीचे है आप वह से डाउनलोड कर सकते है।

मेरे विद्यालय पर निबंध विडियो

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